पिरियड्स में नवरात्रि का व्रत रखना चाहिए या नहीं? जाने इससे जुड़े 10 नियम

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17 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। ऐसे में मां दुर्गा को खुश करने के लिए कई महिलाएं नौ दिन का व्रत भी रखती हैं। हालांकि कई बार इस व्रत के बीच महिला का मासिक धर्म भी आ जाता है। इस कारण महिलाएं इस दुविधा में पड़ जाती है कि उन्हें मासिक धर्म के दौरान नवरात्र व्रत रखना चाहिए या नहीं? आईए जानते हैं।

यदि नवरात्रि के पहले ही आपको मासिक धर्म आ जाए तो व्रत नहीं रखना चाहिए। हालांकि यदि बीच में आए या आप मासिक धर्म में भी व्रत रखना चाहती हैं तो आपको कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा। ये नियम इस प्रकार हैं –

1. मासिक धर्म में व्रत रखने पर माता रानी को मन से पूर्ण श्रद्धापूर्वक याद करें। हालांकि जब बात पूजा पाठ की हो तो ये किसी दूसरे व्यक्ति से करवाएं।

2. आप स्वयं श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ पढ़ तो नहीं सकती हैं, लेकिन उसे सुन जरूर सकती हैं। इसे पढ़ने और सुनने का एक ही लाभ मिलता है।

3. मासिक धर्म में माता रानी के मंत्रों का जाप मन ही मन दूर से करें। इस दौरान आप माला या मंदिर के समीप न जाएं। मंत्र न पढ़ पाएं तो दिल से माता रानी का नाम लेकर उन्हें याद कर लें।

4. माता को नौ दिनों तक भोग भी चढ़ता है। इसे आप स्वयं न बनाए और न ही चढ़ाएं। ये काम किसी अन्य सदस्य से करवा लें।

5. नवरात्र का पहला व्रत रखने के बाद अंतिम व्रत में आपको मासिक धर्म हो जाए तो भी नियमों का पालन करते हुए पूरा व्रत रखें।

6. नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के पहले यदि आपका मासिक धर्म पूरा हो जाए तो पूर्ण स्नान कर और नए कपड़े पहन ही मां की पूजा करें। अंतिम दिन माता रानी से मासिक धर्म के दौरान जाने अंजाने में हुई गलतियों की क्षमा मांगे।

7. मासिक धर्म में मंदिर जाने से बचें। नौ दिनों में से जीतने दिन आप पूजा में शामिल हुए उतने ही लोंग के जोड़े चढ़ाएं।

8. भगवान की मूर्ति और पूजा सामग्री को स्पर्श न करें। दूर से ही माता रानी के हाथ जोड़ नमन करें।

9. माता के प्रसाद को न तो बनाएं और न ही खाएं। व्रत में एक समय का भोजन भी किसी और से ही बनवाएं।

10. मासिक धर्म में धार्मिक क्रियाकलापों में भाग न लें।

इसके अलावा झूठ बोलने और दूसरों की बुराई करने से भी बचें। उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। यदि हां तो इसे शेयर करना न भूलें।