यह है वह शासक जिसको कभी भी हार का मुँह नहीं देखना पड़ा, इसके बारे में जानेंगे तो होश उड़ जाएंगे

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इतिहास हमे कई योद्धाओं के बारे में जानकारी देता है। इन योद्धाओं में एक शासक खूनी योद्धा के नाम से जाना जाता है। आज हम बात कर रहे हैं तैमूरलंग के बारे में ,14 वीं शताब्दी में इनका बहुत दबदबा रहा, इन्होंने कई देशों पर जीत हासिल करी। ऐसा कहा जाता है कि तैमूरलंग को अपने शत्रुओं को कटे हुए सिर इकट्ठा करने का शौक था। लेखक जस्टिन मारोज्जी ने इनके ऊपर एक किताब भी लिखी है, जिसका की नाम ” तैमूरलंग : इस्लाम की तलवार ,विश्व विजेता ” है। इसमें इन्होंने तैमूरलंग के बाहुबल के बारे में भी वर्णन किया है।

यदि इतिहास के महान योद्धाओं की बात करें तो भले ही सिकन्दर महान का नाम पहले याद आता हो लेकिन अगर बात मध्य एशिया और इस्लामिक देशों की करते हैं तो यह सूची तैमूरलंग के नाम के बिना पूरी नही होती है। कुछ मामलों में तैमूरलंग सिकन्दर महान और चंगेज खान से ज्यादा शानदार शख्सियत रखते थे।

आपको बता दें कि तैमूर लंग किसी राजपरिवार में नही जन्मे थे,उनका जन्म एक साधारण परिवार में 1336 में समरकंद ( वर्तमान का उज्बेकिस्तान ) में हुआ था। तैमूरलंग एक चोर थे ये मध्य एशिया के खुले मैदानों से भेड़ चोरी करते थे। तैमूरलंग के पास कोई सेना एवम सिपाही नही थे। लेकिन इन्होंने इलाकाई झगड़ालू लोगों को इकठ्ठा करके अपनी खुद की एक सेना तैयार कर ली थी। तैमूरलंग सन 1402 में सुल्तान बायाजिद प्रथम के खिलाफ युद्ध के मैदान पर उतरे थे। उस वक़्त इनके पास बहुत बड़ी सेना थी। इस सेना में आर्मेनिया लेकर अफगानिस्तान तक और समरकंद से लेकर सर्बिया तक के सैनिक मौजूद थे।

इनका नाम तैमूर रखा गया था,तैमूर का अर्थ होता है लोहा। लेकिन युवा अवस्था मे ही इनके शरीर का दाहिना भाग बहुत अधिक घायल हो गया। तब मजाक में इनका नाम तैमूर ए लंग कहा जाने लगा जिसका की अर्थ था लंगड़ा तैमूर। और इसी तरह इनका नाम तैमूरलंग पड़ गया। तैमूर ने उस वक़्त राजनितिक सत्ता हासिल की जब सत्ता का दावेदार शारीरिक तौर पर पूरी तरह मजबूत होना अनिवार्य होता था। इनके शत्रुओं में तुर्की, बगदाद एवम सीरिया जैसे देशों के शासक थे यह सभी इनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन तैमूरलंग को हरा पाना इनके इन शासकों के लिए कभी सरल नही रहा।

तैमूर और चंगेज में अधिक फर्क नही था, लेकिन चंगेज सभी को एक साम्राज्य बनाना चाहता था और तैमूर केवल अपनी ताकत के दम पर सब हड़पना चाहता था। तैमूरलंग खुले आम लूट पाट और कत्ल को अंजाम देता था। जब तैमूरलंग हिंदुस्तान आया उस समय हिंदुस्तान बहुत अमीर था और उसे यहां से बहुत कुछ मिलने की उम्मीद थी। यहां के शासक नसीरुद्दीन महमूद के बड़ी और ताकत वर सेना के सामने तैमूरलंग का टिक पाना सम्भव नही था। फिर तैमूर ने छोटे इलाकों पर पड़ाव डाले एवं वहां बसने वाले हिंदुओं को मारना शुरू कर दिया।

तैमूर ने सभी हिंदुओ को जलाने का हुक्म दिया और लूट पाट हत्या करता हुआ आगे बढ़ता गया। पंजाब में तैमूर द्वारा कि गई हत्या के डर से लोग पानीपत छोड़ कर दिल्ली की ओर भागे, पानी पट पहुच कर तैमूर ने सब कुछ तबाह लर डाला। और अगले ही दिन उसने दिल्ली में शासक नसीरुद्दीन पर हमला बोल दिया,इस नसीरुद्दीन हार गए और जान बचा कर दिल्ली छोड़ जंगलों में जा छिपे। दिल्ली जीत के जश्न में तैमूर ने स्त्रियों को भी परेशान किया जिसपर आपत्ति उठाने पर उसने वहां से सभी हिंदुओ को मार डालने का हुक्म दे दिया। तैमूर ने यह सब केवल 3 महीनों में कर दिया जिसमें की दिल्ली वह केवल 15 दिन रहा। तैमूरलंग ने लगातार 35 साल तक युध्द के मैदान में जीत हासिल की, साल 1405 में तैमूरलंग का निधन हुआ।