भाजपा ने नितीश को इस बात के लिए साफ तौर पर ना कह दिया, जाने क्या है इसके सियासी संकेत

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दोस्तों बिहार चुनाव के परिणाम सब्बि के सामने आ चुके हैं। इस बार महागठबंधन की ओर से उनका कोई उम्मीदवार नही प्रस्तुत किया गया है। तो यह स्पष्ट हो जाता है कि बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी राज्य सभा के लिए बिना किसी विरोध के चुन लिए जाएंगे। और इसी के साथ बिहार की सियासत में इंकीं भागीदारी कम हो जाएगी। अब सुशील कुमार मोदी बिहार राजनीति में उतने सक्रिय नही रह सकेंगे जितने पहले रहते थे। बिहार में पिछले 15 साल से नीतीश कुमार की सरकार है और ऐसे में कई बार सुशील कुमार मोदी नीतीश कुमार ले लिए बहुत मददगार साबित हुए हैं इन्होंने नीतीश कुमार के लिए संकट मोचन का कार्य किया है।

 

जिस वक्त चुनाव के लिए सुशील कुमार मोदी का फार्म भरा जा रहा था,उस समय नीतीश कुमार वहीं उपस्थित थे। जब मीडिया द्वारा उनसे सवाल पूछा गया तो नीतीश कुमार की भावुकता साफ उजागर ही रही थी। पत्रकारों द्वारा नीतीश कुमार से पूछा गया कि क्या वे सुशील कुमार मोदी को मिस करेंगे? इस प्रश्न का जवाब देते हुए, नीतीश ने कहा ,की वे लोग काफी लंबे समय से साथ है ऐसे में उन दोनों की क्या इच्छा थी यह तो सभी को पता है। नीतीश ने कहा कि वे खुश है कि सुशील मोदी केंद्र जा रहे हैं और बिहार के विकास के लिए वे अपना योगदान देते रहेंगे।

नीतीश कुमार के इस बयान पर बिहार की सियासत में चर्चा शुरू है। उनके बयान का एक से अधिक मतलब निकल रहा है। नीतीश पर इस बार भाजपा आला कमान के तरह से अधिक दवाब था तभी लाख चाहने के बाद भी वे अपने मंत्री मंडल में सुशील मोदी को स्थान नही दे सके। ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि बीजेपी का अंदरूनी एक बड़ा हिस्सा सुशील से नखुश चल रहा था। इसी कारण सुशील मोदी को राज्यसभा भेजने का यह फैसला किया गया।

यही भी कहा जा रहा है कि इससे सुशील मोदी की केंद्र सरकार में अहमियत बढ़ जाएगी और उन्हें कोई मंत्री पद भी प्राप्त हो सकता है। नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने हमेशा मिल कर काम किया है लेकिन इस बार भाजपा के नेताओं को बिहार सियासत में इन दोनों का साथ रास नही आया। इस बार मजबूत विपक्ष का सामना नीतीश कुमार अकेले मुख्यमंत्री पद पर आसीन रह कर करेंगे। सुशील मोदी उनके साथ नही होंगे, और नीतीश को इस बार का दुख है जो कि उनकी बातों से साफ जाहिर है।