पुराने बाथटब में रंजना ने उगाए मोती, पहले ही बार में हुआ 80 हज़ार का मुनाफा- जाने पूरी प्रक्रिया

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मुश्किले चाहे कितनी भी कठिन हो, मेहनत करने वाले उसे पार कर ही लेते हैं। उन्हें चाहे लाख कोई मना करें, जुनूनी लोग सुनते सबकी हैं लेकिन करते अपने मन की है। रंजना के भी परिवार वाले बिल्कुल तैयार नहीं थे कि वह मोती की खेती शुरू करें। उनका कहना था कि आज तक उनके घर में किसी ने बिजनेस नहीं किया है और वह भीअपने बिजनेस में सफल नहीं हो सकेंगी।

उत्तर प्रदेश के आगरा (Agra) की रहने वाली 27 साल की रंजना यादव (Ranjana yadav) जिनके दो बच्चे भी हैं। फॉरेस्ट्री से एमएससी करने के बाद रंजना की ख़्वाहिश थी कि वह ख़ुद का बिजनेस शुरू करें। बचपन से ही उनका लगाओ मोती की तरफ़ था कि आख़िर मोती बनता कैसे है और मोती की खेती होती कैसे है? इन्हीं सारे विचारों के साथ इनका रुझान मोती की खेती की तरफ़ हुआ। लेकिन परिवार वाले ने पूरी तरह से मना कर दिया। तब इनके मन में आया कि अगर उन्हें मनाना है तो सबसे पहले अपनी काबिलियत सबके सामने लानी होगी। वह साल था 2018 का जब इन्होंने अपने घर में ही पढ़े एक पुराने बाथटब में मोती की खेती करने की सोची।

पहली ही बार में 80 हज़ार का मुनाफा कमाया

शुरुआत में रंजना ने मोती की खेती करने के लिए सिर्फ़ 20 सीप लगाएँ और खेती पर काफ़ी मेहनत करने लगी। इनके मेहनत का ही नतीजा था कि 10-12 महीने बाद उसका रंग दिखने लगा। क्योंकि उन्होंने देखा कि उनके लगाए हुए हर सीप में दो मोती थें। रंजना ने सीप में हुए हर मोती को हैदराबाद के गहनों के बाज़ार में 350 से 400 रूपये तक बेचा। सिर्फ उतने ही मोती से रंजना को 80 हज़ार रूपये तक की आमदनी हो गई।

आखिरकार इन्होंने अपनी सफलता अपने परिवार के सामने साबित कर दी और वह लोग भी मोती के इस बिजनेस के लिए तैयार हो गए। मोती की खेती में और भी ज़्यादा सफलता पाने के लिए रंजना ने ट्रेनिंग के लिए भुवनेश्वर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर में एक क्रैश कोर्स में एडमिशन ले लिया और मोती की खेती से जुड़ी और भी जानकारियाँ हासिल की।

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बनी अपने घर में पहली बिजनेसविमेन

भुवनेश्वर से अपनी कोर्स पूरी करने के बाद रंजना ने अपने पिता से आज्ञा लेने के बाद अपने पैतृक घर आगरा में ही (जहाँ अच्छी खासी ज़मीन खाली थी) , वही मोती की खेती करने का फ़ैसला किया। सबसे पहले उन्होंने घर के आंगन में ही 14×14 ज़मीन खुदवा कर तालाब बनवाया और अहमदाबाद से 2 हज़ार सीप ख़रीदीं और इस तरह इन्होंने विधिवानी पर्ल फार्मिंग (vidhivani pearl farming) स्टार्टअप की शुरुआत की। इसी के साथ बन गई अपने घर की पहली बिजनेसविमेन।

10 से 12 महीने में मोती तैयार हो जाते हैं

मोती बनाने की प्रक्रिया के बारे में रंजना बताती हैं कि इसमें बहुत ही ध्यान की ज़रूरत होती है। सबसे पहले आपको सीट को एक दिन ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। जिसके बाद उसे 7 दिन तक क्षर उपचारित पानी में डुबोकर रखना चाहिए। मोती बनाने की प्रक्रिया के बारे में रंजना बताती हैं कि इसमें बहुत ही ध्यान की ज़रूरत होती है। सबसे पहले आपको सीट को एक दिन ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। जिसके बाद उसे 7 दिन तक क्षर उपचारित पानी में डुबोकर रखना चाहिए। पानी के तापमान, सफ़ाई इत्यादि का रखना होता है ध्यान

पानी के तापमान, सफ़ाई इत्यादि का रखना होता है ध्यान, जैसे पानी का तापमान समय-समय पर जांचना, तालाब की सफ़ाई और उसके साथ ही यह भी देखना चाहिए कि उन्हें ठीक से चारा मिल रहा है या नहीं।

रोज 3 से 4 घंटे मोतियों की करती हैं देखभाल

रंजना कहती हैं कि वह इन मोतियों की देखभाल अपने बच्चों के समान करती हैं। वह रोज़ सुबह अपने पैतृक घर जाकर 3 से 4 घंटे मोतियों की देखभाल करती हैं। अगर कुछ समस्या है तो उन्हें दवाइयाँ भी देती है, क्योंकि वह बताती है कि अगर मौसम अनुकूल ना हुआ तो उनके मृत्यु की संभावना 90% तक बढ़ जाती है, इसलिए तापमान की जांच करना बहुत ज़रूरी होता है।

अब तक 16 कृषि छात्रों को प्रशिक्षण दे चुकी और कई किसानों के खेत भी तैयार करवा चुकी हैं

मोती की खेती करने वाली रंजना अब तक 16 कृषि छात्रों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और यूपी के हाथरस में 10 किसानों को उनका मोदी का खेत तैयार कराने में मदद भी कर चुकी हैं। अलग-अलग पानी में मोती की खेती करने को लेकर रंजना कहती हैं कि जो मोती मीठे पानी में तैयार की जाती है वह डिजाइनर मोती होते हैं, जबकि खारे पानी में गोल आकार के मोती होते हैं। जो मोती मीठे पानी में उगाया जाता है उसमें लागत भी कम होती है और मुनाफा भी अच्छा खासा होता है।

उन्होंने समंदर में मोती उगाने की बात पर कहा कि उसके लिए सबसे पहले आपको पूरी तरह से प्रशिक्षित होना पड़ेगा। जबकि थोड़ी-सी ट्रेनिंग में भी आप मीठे पानी में मोती उगा सकते हैं। रंजना बताती हैं कि अब एशिया में भी लोग एक ही सीप में 20 तक मोतियाँ उगा रहे हैं।

सच में रंजना ने अपने जीवन में बहुत ही अलग काम चुना है। अगर वह शुरुआत में ही लोगों के कहने पर हार मान जाती तो शायद वह यहाँ तक नहीं पहुँच पाती और सफल भी नहीं हो पाती। आज वह हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है जिनका सपना मोती उगाने का होता है।

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