तांबे के बर्तन में रही यह चीजें हो जाती है जहर के समान,खाते ही होगी उल्टी……………..

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भारतीय संस्कृति में ताबे के बर्तनों को अलग ही योगदान है.कहा जा सकता है की भारतीय संस्कृति का जिक्र किया जाए तो ताबे के बर्तन का नाम नहीं हो अधूरा सा लगता है.ताबे के बर्तन प्राचीन काल से भारतीय रसोई के सबसे महत्त्वूर्ण थे.पहले जमाने में ताबे के ही बर्तन उपयोग किए जाते है.पुराणों और शास्त्रों में ताबे के बर्तनों के हजारों फायदे बताए गए.हम प्राचीन कालीन संस्कृति और उस समय की सभ्यताओं जैसे मोहन जोदड़ो, हड़प्पा सभ्यता, काली बंगा आदि सभ्यताओं में सबसे पहले अगर किसी धातु की खोज हुई तो वो तांबा है.

अगर हम हिस्ट्री में पढेगे तो पाएंगे कि ताबे का उपयोग वैदिक संस्कृति से हो रहा है.ओर इसके उपयोग से होने वाले फायदे भी अनेक है.कहा जाता है अगर किसी व्यक्ति रोजाना ताबे के बर्तन में पानी और खाना खाता है तो उसकी सेहत हमेशा अच्छी रहती है क्युकी ताबे में एक खास प्रकार का गुण पाया जाता है जो जीवाणुओं को नष्ट कर देता है.लेकिन क्या आपको मालूम है तांबे के बर्तनों का उपयोग करते समय कुछ खास बातें ध्यान रखनी पड़ती है वरना आपकी स्वास्थ्य खराब हो सकता है.

आज के समय ने तांबे के बर्तनों का उपयोग बहुत कम यानि ना के बराबर है.को उपयोग करना चाहते है तो उनको कुछ बातो का खयाल रखना पड़ेगा.तांबे के बर्तन में आचार ओर दही का सेवन नहीं करना चाहिए.क्योंकि अचार और दही ताबे के साथ रिएक्शन कर खतरनाक यौगिक बन जाता है जो किसी भी मनुष्य के लिए विषेला साबित हो सकता है और उसको उल्टियां दस्त शुरू हो जाती है.

आमतौर पर बात करे तो उसे फ़ूड पॉइजिंग हो जाती है.इसलिए आप इस बात को खयाल रखे की तांबे के बर्तन में दही और अचार नहीं खाना है.खट्टे फल और दूध का सेवन भी तांबे के बर्तनों में नहीं करना चाहिए क्युकी तांबे के बर्तन केमिकल बना देते है जो आपके लिए हानिकारक हो सकते है.

अब आओ तांबे के बर्तनों को उपयोग करे तो इन बातो का खास खयाल रखें.अन्यथा आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है.आधुनिक जानने में तांबे के बर्तनों को यूजलेस समझ कर उपयोग नहीं करते है लेकिन उनको मालूम नहीं है तांबे के बर्तनों से इंसना में इम्यूनिटी विकसित हो जाती है जिससे उसको कोई बीमारी नहीं लगती है और वह हेल्थी जीता है ।